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गुरुवार, फ़रवरी 11, 2016

पं. दीन दयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि ....11 फरवरी 1968 ... रहस्यमयी मृत्यु .....

Rashtravadi Vyaktitva - Deen Dayal Upadhyay - a book written By Sharad Singh 
रहस्यमयी मृत्यु .....
‘‘11 फरवरी 1968 को मुगलसराय रेलवे स्टेशन के निकट पं. दीनदयाल उपाध्याय जी मृत पाए गए।‘‘
‘‘माननीय चन्द्रचूड़ की अध्यक्षता में गठित ‘चन्द्रचूड़ आयोग’ ने पं. दीनदयाल उपाध्याय की हत्या के कारणों एवं परिस्थितियों को नए सिरे से जांचना आरम्भ किया। आयोग ने वाराणसी के विशेष जिला एवं सत्र न्यायाधीश मुरलीधर द्वारा दिए गए कई बिन्दुओं पर अपनी असहमति जताई। आयोग ने नवीन दृष्टिकोण से घटना का स्प्ष्टीकरण सामने रखा।

बिन्दु एक - दीनदयाल जी की हत्या चोरी के उद्देश्य से की गई थी।
इस विषय में आयोग ने विवेचना करते हुए लिखा कि-‘‘यदि श्री उपाध्याय की मृत्यु के साथ उनके सामान की चोरी भी हुई और यदि हत्या और चोरी किसी एक योजना के अंग हैं तो यह निषर्ष निकालना युक्तिसंगत है कि इस हत्या का राजनीति से कोई संबंध नहीं है। हत्या कुछ लाभ के उद्देश्य से की गई और हत्या का कुछ तत्कालीन कारण या तो चोरी करते समय पकड़े जाने से बचना था या यह कि चोरी सुविधा से की जा सके।’’

बिन्दु दो - हाथ में पांच रुपए का नोट पाया जाना।
पं. दीनदयाल उपाध्याय के एक हाथ में पांच रुपए के नोट का पाया जाना एक अहम बिन्दु था। इस बिन्दु पर आयोग की ओर से टिप्पणी की गई कि - ‘‘केवल इस बात के अलावा मेरी समझ में बिलकुल नहीं आया कि कौन और क्यों उनके हाथ में नोट रखेगा? हत्यारे, विशेषकर राजनीतिक हत्यारे, अपना काम करने के बाद घटनास्थल पर ठहरते नहीं। यह भी समझ में आ सकता है, यद्यपि मैंने इस संभावना को नहीं माना है लाश खम्भे के पास रखी गई ताकि वह एक दुर्घटना जान पड़े। परन्तु यह मैं नहीं मान सकता कि दुर्घटना सिद्ध करने के प्रयास में षडयंत्राकारियों ने इत्मिनान से काम किया कि उसमें कोई त्राुटि न रह जाए। अतः नोट उनके हाथ में रखने की बात सर्वथा अमान्य है।’’
इसी तारतम्य में आयोग का मत था कि -‘‘पहले वाले निष्कर्ष से यह युक्तियुक्त परिणाम निकलता है कि मुतक अपनी मुत्यु के समय नोट अपने साथ लिए हुए था।’’
उपरोक्त दोनों बिन्दुओं के निष्कर्षतः परिणाम न निकल पाने तथा जांच के दौरान रह जाने वाली कमियों के कारण ‘चन्द्रचूड़ आयोग’ भी पं. दीनदयाल उपाध्याय की हत्या के वास्तविक कारणों की तह तक नहीं पहुंच सका। आयोग के निष्कर्षों पर टिप्पणी करते हुए नानाजी देशमुख ने कहा था कि -‘‘इस प्रकार पं. दीनदयाल उपाध्याय की हत्या आज भी भयंकर रहस्य बनी हुई है।’’

अनुत्तरित प्रश्न
निःसंदेह कुछ प्रश्नों का उत्तर नहीं मिल सका। जैसे -
1. यदि चोरी का उद्देश्य था और पकड़े जाने की स्थिति में हत्या जैसा जघन्य अपराध कारित हुआ तो हत्यारे अथवा चोर शव के हाथ से घड़ी क्यों नहीं क्यों नहीं ले गए?
2. इसी प्रकार स्टेशन से 300 गज दूर दीनदयाल जी ने अपने हाथ में पांच रूपए का नोट निकाल कर क्यों रख लिया था?
यदि इन प्रश्नों का उत्तर जांच-पड़ताल में तलाश लिया गया होता तो दीनदयाल जी के वास्तविक हत्यारों को पकड़ा जा सकता था तथा हत्या के वास्तविक कारण का पता चल पाता। ‘‘
(मेरी पुस्तक ‘‘राष्ट्रवादी व्यक्तित्व पं. दीन दयाल उपाध्याय’’ का एक अंश...डाॅ. शरद सिंह)