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मंगलवार, दिसंबर 03, 2013

भारतीय मूर्तिकला में प्रतीक तत्व (Symbolic element in Indian sculpture)




- डॉ शरद सिंह 
 
         
    प्रतीक अप्रस्तुत को प्रस्तुत करता है। अमूर्त को मूर्त करता है। सम्पूर्ण बीजगणित की गणितीय प्रणाली प्रतीकों पर निर्भर है क्योंकि उसमें ‘अ’ ‘ब’ ‘स’ अप्रस्तुत का प्रतिनिधित्व करते हैं। आध्यात्म में यही है। ‘ऊॅ’ - ब्रह्मा के लिए, परम, चरम एवं चिरन्तन सत्य के लिए प्रयुक्त होता है। कुछ चिन्ह भी प्रतीक का कार्य करते हैं, जैसे चक्र विष्णु या कृष्ण का प्रतिनिधित्व करता है। त्रिशूल और डमरु शिव की ओर संकेत करते हैं। मात्रा त्रिशूल का प्रदर्शन शक्ति का प्रतीक होता है।
    आंग्ल भाषा में प्रतीक के लिए ‘सिम्बल’ (Symbol) शब्द प्रयुक्त हुआ है। सिम्बल अथवा प्रतीक के कुछ अर्थ यहां प्रस्तुत हैं:-
    ‘‘एक प्रतीक जो कि किसी अन्य परम्परा अथवा रीति-रिवाज का प्रतिनिधित्व करता हो, एक प्रतीक धार्मिक सिद्धांत, धार्मिक शिक्षा के सार अथवा विशिष्ट धार्मिक अनुष्ठान का प्रतिनिधित्व करता हो।’’- चेम्बर्स ट्वेंटीन्थ सेंचुरी डिक्शनरी, 1983 पृ. 1309
    ‘‘संकेत अथवा वस्तु पुनस्र्मरण कराता हो, किसी वस्तु का प्रतीक अथवा प्रतिनिधित्व करता हो, चिन्ह अथवा संकेत किसी विधि-विधान अथवा क्रिया अथवा दमित वस्तु का प्रतिनिधित्व करता हो, अज्ञात को प्रस्तुत करने वाला, स्मरण कराने वाला आदि।’’ - द न्यू लेक्सिकन वेब्सटर्स इनसाइक्लोपीडिक डिक्शनरी आॅफ द इंग्लिश लैंग्वेज, डीलक्स संस्करण, संशोधित एवं परिवर्धित 1992, पृ. 1002
Brahma

‘‘कुछ ऐसा जो प्रतिनिधित्व के लिए प्रदर्शित हो, अथवा किसी अन्य का अर्थ रखता हो, एक लौकिक वस्तु जो अलौकिक अथवा अमूर्त का प्रतिनिधित्व करती हो, एक वस्तु जो किसी अन्य वस्तु का प्रतिनिधित्व करती हो, वह तत्व जो ईसा के शरीर और रक्त में से किसी एक अथवा दोनों में से प्रत्येक का प्रतिनिधित्व करता हो।’’- द शाॅर्ट आॅक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी आॅन हिस्टोराईड प्रिंसीपल्स, वाल्यूम सेकेंड, तृतीय संस्करण, 1944, पृ. 2109
    ‘‘मूल रूप से और बहुधा वह जटिल कलात्मक स्वरूप अथवा संकेत जो धार्मिक अंतर्वस्तु के मूल तत्व के लिए प्रयुक्त होता है । प्रतीक ‘अभिप्राय’ के अर्थ में विभिन्न रूपों में पाया जाते हैं -
        1. मानवतारोपी अथवा मानवीकरण अभिप्राय
            (Anthropomorphic Motifs) 
        2. सैद्धांतिक अथवा पशुरूपी अभिप्राय
           (Theriomorphic or Zoomorphic Motifs)
        3. संकरित अभिप्राय
           (Hybrid Motifs)
        4. वर्णिक अभिप्राय
            (Chromatomorphic Motifs)
        - द न्यू इनसाइक्लोपीडिया ब्रिटेनिका, वाल्यूम - 17, पृ. 900   
    उन्नीसवीं सदी के अंत तथा बीसवीं सदी के आरम्भ में योरोपीय साहित्य में ‘सिम्बोलिज्म’ अर्थात् ‘प्रतीकात्मकता’ का प्रयोग प्रारम्भ हुआ। इसका प्रयोग योरोप के प्रकृतिवादी एवं यथार्थवादी आन्दोलनकारियों ने शुरू किया। ये आंदोलनकारी ‘प्रतीकात्मकतावादी’ (Symboist) कहलाए। प्रतीकात्मकवादी मेलार्म (Mallarme) ने प्रतीकात्मकता को परिभाषित करते हुए स्पष्ट किया है कि यह काव्य को अर्थवत्ता और संगीत की शक्ति है जो किसी भी भाषा माध्यम से अधिक महत्वपूर्ण है। मेलार्म और वेलेरी की विशुद्ध प्रतीकात्मकता के तत्व हाॅकिन्स, इलियट, प्रोस्ट एवं जोई की रचनाओं में मिलते हैं। संगीत में प्रतीकात्मकता को लाने का श्रेय डेबूसी (Debussy) को है। इसी प्रकार नाट्य कला में मेटरलिंक (Maeterlink) ने प्रतीकवाद का समावेश किया। इस प्रकार साहित्य की विविध विधाओं के साथ-साथ चित्राकला और मूर्तिकला में प्रतीकात्मकता के तत्व प्रचलन में आए।
Symbols

    प्रतीकात्मकता (Symbolism) का अर्थ है:-
        1. ‘‘प्रतीकों अथवा संकेतों के द्वारा प्रतिनिधित्व, प्रतीक व्यवस्था, उन्नीसीं सदी के अंत में
        कला एवं काव्य में जन्म वह आन्दोलन जो वास्तविकता की ओर संकेत करने अथवा किसी
        अन्य महत्वपूर्ण तथ्य को प्रस्तुत करने में विश्वास रखता था।’’   
        - चेम्बर्स ट्वेंटीन्थ सेंचुरी डिक्शनरी, 1983, पृ. 1309-10
        2. ‘‘प्रतीकों के द्वारा प्रतिनिधित्व, प्रतीक व्यवस्था, वे सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक गतिविधियां
        जो प्रतीकात्मवादी अपनाते थे।’’
        - द न्यू लेक्सिकन वेब्सटर्स इनसाइक्लोपीडिक डिक्शनरी आॅफ द इंग्लिश लैंग्वेज, डीलक्स
        आॅफ संस्करण, 1992, पृ. 1002
        3. ‘‘वह क्रियान्वयन जिसमें प्रतीकात्मवादी वस्तुओं को प्रतीक रूप में प्रस्तुत करते थे, प्रतीक
        व्यवस्था, वस्तु अथवा क्रिया को प्रतीक रूप प्रदान करना।’’
        - द शार्टर आॅक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी आॅन हिस्टोराईड प्रिंसीपल्स, वाल्यूम सेकेंड,
        तृतीय संस्करण, 1944, पृ. 2109 
Laxami

    सारांशतः किसी विस्तृत बात को संक्षेप में और सुन्दरता से कहे जाने का ढंग प्रतीक कहलाता है। किसी तथ्य को स्पष्ट अथवा सीधे सरल शब्दों में अभिव्यक्त करने के बदले यदि लालित्यपूर्ण सांकेतिक शैली में व्यक्त किया जाए तो प्रतीक शैली कही जाती है। इसी प्रकार मूर्तिकला में लौकिक-अलौकिक तथ्यों की अभिव्यक्ति के लिए प्रतीकों का प्रचलन है। देवता तथा उससे संबंधित विचारों की अभिव्यक्ति प्रतीकों के द्वारा होती है। भारतीय मूर्तिकला में प्रतीकों के माध्यम से देव प्रतिमा का समीकरण भी किया जाता है। देवता के चिन्तन के साथ ही उपने प्रतीक तत्व भी स्मृति में उभर आते हैं। इस प्रकार प्रतीक तत्व प्रतिमा और उससे संबंधित विचारों को परस्पर जोड़ने का कार्य करते हैं। प्रतीकों की प्रमुखता के कारण प्राचीन भारतीय मूर्तिकला ‘प्रतीकात्मक कला’ कही जाती है। प्रतीकों का सर्वाधिक सुन्दर और सार्थक प्रदर्शन भारतीय मूर्तिकला की विशेषता कही जा सकती है।
    खजुराहो के मंदिरों में अंकित मूर्तियों में विविध प्रकार के प्रतीकों का प्रदर्शन किया गया है। अध्ययन की सुविधा के लिए इन प्रतीक तत्वों को निम्नलिखित तीन श्रेणियों में विभक्त किया जा सकता है:-
                   (अ)   आयुध प्रतीक (
Weapon Symbol)              
                   (ब)    वाहन प्रतीक (Vehicle Symbol)                  
                   (स)    मांगलिक प्रतीक (Auspicious symbols)
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3 टिप्‍पणियां:

  1. कलात्मक अभिव्यक्ति के इतर क्या गूढ़ विषयों को समझाने या

    विज्ञान जैसे विषयों में पराभोतिक स्तर तक पहुँचने पर भी

    क्या ये सिंबल काम करते रहे होंगे?

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  2. जी हां, सिंबल मूल का समीकरणीकृत रूप होते हैं।

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