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गुरुवार, अगस्त 18, 2011

नैमिषारण्य की प्राचीनता और महत्व -गतांक से आगे

नैमिषारण्य- महर्षि व्यास की गद्दी मंदिर
- डॉ. शरद सिंह




















































































अगली कड़ी में नैमिषारण्य के प्रमुख स्थानों का विवरण .....

30 टिप्‍पणियां:

  1. नैमिषारण्य के संबंध में आपका शोधपूर्ण आलेख अच्छा लगा. इसके दोनों भाग पढ़ लिए. मुझे लगता है आप मिथिहास से इतिहास तक की यात्रा कराकर धार्मिक पर्यटन का आनंद प्रदान करना चाहती हैं. बहरहाल इसकी अगली कड़ी का इंतजार है.

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  2. महर्षि दधिच के बारे में हमारी अपूर्ण जानकारी को पूर्णता तक पहुँचवाने के लिये धन्यवाद आपको.

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  3. अद्भुत जानकारी मिली ... इतना सब कुछ नहीं पता था ..आभार

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  4. कमाल के विषय और जानकारी लाती हैं आप ...
    शुभकामनायें आपको !

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  5. देवेंद्र गौतम जी,
    हार्दिक धन्यवाद!
    आप जैसे प्रबुद्ध लेखक की राय मेरे लिए महत्वपूर्ण है।

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  6. चंद्रमौलेश्वर प्रसाद जी,
    आपने रुचिपूर्वक मेरे लेख को पढ़ा...आभारी हूं.

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  7. सुशील बाकलीवाल जी,
    आभारी हूं कि आपने मेरे लेख को ध्यानपूर्वक पढ़ा और अपने अमूल्य विचारों से अवगत कराया.

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  8. संगीता स्वरुप जी,
    आपकी महत्वपूर्ण टिप्पणी के लिए आभारी हूं आपकी।
    मेरे लेख को पसन्द करने के लिए हार्दिक धन्यवाद!

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  9. सतीश सक्सेना जी,
    आपको लेख पसंद आया यह जानकर प्रसन्नता हुई.
    आपकी सुधी टिप्पणी के लिए आभारी हार्दिक धन्यवाद एवं आभार ..

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  10. अनुराग शर्मा जी,
    मेरे लेख को पसन्द करने और बहुमूल्य टिप्पणी देने के लिए हार्दिक धन्यवाद!
    इसी तरह सम्वाद बनाए रखें।

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  11. विश्लेषण और प्रस्तुतीकरण ठीक है।

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  12. विजय माथुर जी,
    आपकी सुधी टिप्पणी के लिए आभारी हार्दिक धन्यवाद एवं आभार ....

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  13. बहुत बढ़िया और महत्वपूर्ण जानकारी मिली! आपने बहुत सुन्दरता से विस्तारित रूप से प्रस्तुत किया है! धन्यवाद!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

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  14. ये मुझे पता नहीं था...
    धन्यवाद...
    राजेश

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  15. अद्भुत जानकारी देती पोस्ट। इस विषय पर जानकारे न के बराबर थी। आभार आपका कि आपने इसे विस्तार से समझाया।

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  16. उर्मि जी,
    मेरे लेख को पसन्द करने के लिए हार्दिक धन्यवाद!

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  17. राजेश कुमार नचिकेता जी,
    मेरे लेख को पसन्द करने और बहुमूल्य टिप्पणी देने के लिए हार्दिक धन्यवाद!

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  18. मनोज कुमार जी,
    आभारी हूं कि आपने मेरे लेख को ध्यानपूर्वक पढ़ा और अपने अमूल्य विचारों से अवगत कराया.

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  19. पौराणिक कथाओं की जानकारी दे कर आप बड़ा उपकार रही हैं .इन कथाओँ को पढ़ कर उन मान्यताओं पर प्रकाश पड़ता है जिनसे आज भी हम किसी न किसी रूप में जुड़े हुये हैं.
    आभार आपका !

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  20. रमादान (रमजान ,रमझान )मुबारक ,क्रष्ण जन्म मुबारक .इस पौराणिक आख्यान को आपने जिस शोधपरक शैली में प्रस्तुत किया है वह बहुत ज्यादा पठनीय और अनुपम बन पड़ा है .....लेकिन इस दौर को क्या कहिएगा -अरे दधिची झूंठा होगा ,जिसने कर दीं दान अस्थियाँ ,जब से तुमने वज्र सम्भाला ,मरने वाला संभल गया है .(सन्दर्भ :आपातकाल ).और अब रामदेव जी के बाद अन्ना जी ......
    ....
    जय अन्ना ,जय भारत . . रविवार, २१ अगस्त २०११
    गाली गुफ्तार में सिद्धस्त तोते .......
    http://veerubhai1947.blogspot.com/2011/08/blog-post_7845.html

    Saturday, August 20, 2011
    प्रधान मंत्री जी कह रहें हैं .....
    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com/
    गर्भावस्था और धुम्रपान! (Smoking in pregnancy linked to serious birth defects)
    http://sb.samwaad.com/

    रविवार, २१ अगस्त २०११
    सरकारी "हाथ "डिसपोज़ेबिल दस्ताना ".

    http://veerubhai1947.blogspot.com/

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  21. कल 24/08/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  22. अनुराग शर्मा जी,
    मेरे लेख को पसन्द करने के लिए हार्दिक धन्यवाद!

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  23. प्रतिभा सक्सेना जी,
    आपकी सुधी टिप्पणी के लिए आभारी हार्दिक धन्यवाद एवं आभार ....

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  24. कुंवर कुसुमेश जी,
    आभारी हूं कि आपने मेरे लेख को ध्यानपूर्वक पढ़ा और अपने अमूल्य विचार से अवगत कराया.

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  25. वीरूभाई जी,
    आभारी हूं कि आपने मेरे लेख को ध्यानपूर्वक पढ़ा और अपने अमूल्य विचारों से अवगत कराया.

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  26. यशवन्त माथुर जी,
    यह जानकर सुखद अनुभूति हुई कि आपने मेरे इस लेख का चयन नयी- पुरानी हलचल हेतु किया है .
    आपको बहुत बहुत धन्यवाद !

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