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बुधवार, जुलाई 20, 2011

कोणार्क का काला पगोडा और महाबलीपुरम का सप्त पगोडा

कोणार्क की नारी प्रतिमा
- डॉ.शरद सिंह 

क्या है ‘पगोडा’ ?

भाषाशास्त्रियों के अनुसार ‘पगोडा’ शब्द  संस्कृत के ‘दगोबा’ शब्द का अपभ्रंश रूप है। बर्मी ग्रंथों में पगोडा  शब्द का उद्भव लंका  की भाषा सिंहल  के शब्द ‘डगोबा’ से माना गया है जो मूलतः संस्कृत शब्द है। ‘डगोबा’ का अर्थ है ‘पवित्र अवशेषों की स्थापना का स्थल’। इन्हें ‘स्तूप’ भी कहा गया।
     पगोडे पिरामिड आकार के, गुंबदीय अथवा बुर्ज की आकार के बनाए जाते थे।भारत में पगोडे मंदिरों के द्वार पर अथवा मुख्य मूर्तिस्थल के ऊपर बनाए गए। 
    बौद्ध पगोडे महात्मा बुद्ध तथा बौद्ध धर्म में प्रचलित मान्यताओं के अनुरूप स्मृति-स्थल के रूप में निर्मित हुए जबकि हिन्दू धर्म में हिन्दू मान्यताओं के अनुरूप इन्हें पूजा स्थल अर्थात् मंदिर का रूप मिला।
जुआंगझिओ का लौह पगोडा,चीन

होरयू-जी मंदिर का पगोडा,जापान
पगोडा निर्माण की परम्परा भारत से चीन और चीन से जापान होती हुई सुदूर पूर्व में विकसित होती गई। पगोडा संबंधित देशों के स्थानीय स्थापत्य शिल्प में बनाए गए। ये कई मंजिल के और भिन्न आकार के हो सकते थे।


 (RohitBisht comment on my post 'मिथुन मूर्तियों का रहस्य '  
Nice article,madam please tell me why Kornak Temple is called as 'Black Pagoda'? This is a Sun temple,has it shape like Pagoda of south east asia? similar question arise for Sapt Pagoda of Mahabalipuram. (Friday, July 15, 2011 3:00:00 PM) )

कोणार्क का ब्लैक पगोडा

कोणार्क का रथमंदिरः काला पगोडा
कोणार्क के सूर्य मंदिर को ब्लैक पगोडा भी कहा जाता है। यह  भारत के उड़ीसा राज्य के पुरी नामक शहर में स्थित है। इसे लाल बलुआ पत्थर एवं काले ग्रेनाइट पत्थर से 12361264 ई.पू. में गंग वंश के राजा नृसिंहदेव द्वारा बनवाया गया था। इसे युनेस्को द्वारा सन 1984 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है। कलिंग शैली में निर्मित यह मंदिर सूर्य देव (अर्क) के रथ के रूप में निर्मित है। मंदिर एक विशाल पत्‍थर के रथ का स्‍वरूप लिए हुए है । ऐसा लगता है जैसे किसी विशाल मंदिर रूपी रथ को आसमान के पार  खींचा जा रहा हो ।  
       
   रथ-मंदिर के बारह पहिये बारह महीनों के प्रतीक हैं और इसके पहिये की सोलह तीलियां दिन के समय का प्रतीक हैं । इस को पत्थर पर उत्कृष्ट नक्काशी करके बहुत ही सुंदर बनाया गया है। संपूर्ण मंदिर स्थल को एक बारह जोड़ी चक्रों वाले, सात घोड़ों से खींचे जाते सूर्य देव के रथ के रूप में बनाया है। मंदिर में खजुराहो की तरह मिथुन मुद्राओं वाली मूर्तियां भी हैं।
      काले ग्रेनाइट पत्थरों से निर्मित होने के कारण कोणार्क के सूर्य मंदिर को ब्लैक पगोडा भी कहा जाता है।

महाबलीपुरम का सप्त पगोडा

महाबलीपुरम के रथ मंदिर अर्थात् सप्त पगोडा
         दक्षिण भारत में महाबलीपुरम अथवा मामल्लपुरम में स्थित  
‘सप्त पगोडा’ महाभारत महाकाव्य के पांडव भाइयों के रथों के रूप में निर्मित है। महाबलीपुरम् की वास्‍तुकला की तीन प्रमुख शैलियों का सम्‍बंध राजा मामल्‍य, उनके बेटे नरसिंह वर्मन और राजसिंह के शासन काल से है । महाबलीपुरम् की शैली सबसे प्राचीन और सरल है जो चट्टान को काटकर बनाये गये मंदिरों में पायी जाती है । लगभग 8 वीं तथा उसके बाद नरसिंहवर्मन और राजसिंह काल में ग्रेनाइट पत्‍थर के शिला-खंडों से मंदिरों का निर्माण किया गया था ।
विष्णु प्रतिमा, मामल्लपुरम
    मामल्ल शैली का विकास नरसिंह वर्मन प्रथम के काल में हुआ। इसके अन्तर्गत रथ मंदिरों का निर्माण किया गया। ये मंदिर मामल्लपुरम में हैं। रथ मंदिर में द्रौपदी रथ सबसे छोटा है। इसमें किसी प्रकार का अलंकरण नहीं है। धर्मराज रथ के रथ मंदिर पर नरसिंह वर्मन की मूर्ति अंकित है। ग्रेनाइट पत्‍थर के पत्थरों से बनाए जाने तथा सात की संख्या में होने के कारण इन रथों को 'सप्त पगोडा' भी कहा जाता है। सप्त पगोडा के अन्तर्गत निम्नलिखित रथ बनें- 'धर्मराज रथ', 'भीम रथ', 'अर्जुन रथ', 'सहदेव' रथ, 'गणेश' रथ, 'वलैयकुट्ई' रथ और 'पीदरी' रथ। 
       कोणार्क का सूर्य मंदिर अर्थात् ब्लैक पगोडा और महाबलीपुरम का सप्त पगोडा भारतीय शिल्प एवं स्थापत्य कला की कालजयी धरोहर हैं।

48 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छी जानकारी देती आपकी पोस्ट अच्छी लगी ...

    कोणार्क के सूर्य मंदिर को युनेस्को द्वारा सन 1984 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है.
    इस जानकारी के लिए शुक्रिया

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  2. ज्ञानवर्धक जानकारी है।सूरी के रथ मेन सात घोड़े सार रंगों के प्रतीक के रूप मेन हैं।

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  3. अपूर्व एतिहासिक जानकारी!! इन्हें पगौड़ा कहा जाता है पहली बार जाना। हम तो यही समझते थे कि बौध चेत्यों स्तूपों को ही पगौड़ा कहा जाता है।

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  4. संगीता स्वरुप जी,
    कृतज्ञ हूं कि आपने मेरे लेख को पसन्द किया.
    हार्दिक धन्यवाद!

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  5. विजय माथुर जी,
    जानकर प्रसन्नता हुई कि आपको मेरा लेख पसन्द आया....
    आभारी हूं...

    उत्तर देंहटाएं
  6. सुज्ञ जी,
    आभारी हूं कि आपने मेरे लेख को ध्यान से पढ़ा और
    अपने विचार प्रकट किए...हार्दिक धन्यवाद!

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  7. डॉ. शरद जी उपकृत हूं, इस बेहतरीन तथ्यात्मक और स्थापत्य से संबंधित जानकारी प्राप्त कर।

    आज जाना कि क्यों सूर्यमंदिर को ब्लैक पगोडा कहा जाता है। बचपन से केवल सुनते और पढ़ते आ रहे थे, और यह मान लिए थे कि काले रंग का होगा इसलिए कहते होंगे।

    चित्रों ने इस पोस्ट के महत्व को कई गुणा बढा दिया है। अमूल्य निधि दे रही हैं आप ब्लॉगजगत को।

    आभार इस प्रस्तुति के लिए।

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  8. बहुमूल्य जानकारी के लिये धन्यवाद, एक अनुरोध है कि जल्दी जल्दी नयी पोस्ट लिखा करें ।

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  9. मनोज कुमार जी,
    आपके विचारों ने मेरा उत्साह बढ़ाया...हार्दिक धन्यवाद एवं आभार ... कृपया इसी तरह सम्वाद बनाए रखें।

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  10. नीरज रोहिल्ला जी,
    जानकर प्रसन्नता हुई कि आपको मेरा लेख पसन्द आया....
    आभारी हूं...

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  11. प्रायः यह समझा जाता है कि पगोडा चीनी या बर्मी बौद्ध शिल्प कला है। इस विषय पर अच्छी जानकारी के लिए आभार॥

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  12. चंद्रमौलेश्वर प्रसाद जी,
    कृतज्ञ हूं कि आपने मेरे लेख को पसन्द किया.
    हार्दिक धन्यवाद!

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  13. उपरोक्त उत्कृष्ट एवं सारगर्भित जानकारी हेतु धन्यवाद,तो क्या
    इन मंदिरों के निर्माण स्थल में पवित्र अवशेषों की स्थापना
    की गयी है ठीक बौध स्तूपों जैसे?

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  14. रोहित बिष्ट जी,
    जानकर प्रसन्नता हुई कि आपको मेरा लेख पसन्द आया....
    इन मंदिरों के निर्माण स्थल में पवित्र अवशेषों की स्थापना नहीं की गई है. पगोडा स्थापत्य शिल्प की एक शैली है जिसे विभिन्न काल, स्थान और धार्मिक परम्पराओं के अनुरूप अपनाया गया.

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  15. बेहद अच्छी जानकारी दी हैं आपने.....चित्रों के साथ और भी रोचक बन पड़ी है.धन्यवाद.

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  16. cd sarada ji,
    Thanks for your comments.Hope you will be give me your valuable response on my future posts.

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  17. ऐसी रोचक जानकारियाँ पढ़कर मन तो अपने आप ही इन मंदिरों की यात्रा करने चल दिया लेकिन पता नहीं तन कब पहुंचेगा | हालांकि मन को वहाँ तक पहुंचाने में आपकी रोचक भाषा के साथ चित्रों की उपस्थिति ने विशेष योगदान दिया है |

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  18. घर बैठे ज्ञान वृद्धी हो गयी इतिहास की अच्छी झलकियां देखने मिलती है आपके ब्लाग मे

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  19. देवांशु (शिवम्) जी,
    जानकर प्रसन्नता हुई कि आपको मेरा लेख पसन्द आया....

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  20. अरुणेश सी दवे जी,
    कृतज्ञ हूं कि आपने मेरे लेख को पसन्द किया.
    हार्दिक धन्यवाद!

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  21. prakriti ke kareep rahne ke liye mai akshar hindustan ke kone kone men ghumta rahata hun.ji chahta hai kuch likhoon. prerna deti prastuti--itihas hee hamen khud se rubaru karati hai.

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  22. बहुत ही उपयोगी और रोचक जानकारी।
    -------
    कल 27/07/2011 को आपकी एक पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  23. संदीप पवाँर जी,
    कभी अवसर मिले तो अवश्य देखिए.

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  24. नीलम चंद जी,
    कृतज्ञ हूं कि आपने मेरे लेख को पसन्द किया.
    हार्दिक धन्यवाद!

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  25. संजय भास्कर जी,
    जानकर प्रसन्नता हुई कि आपको मेरा लेख पसन्द आया....

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  26. यशवन्त माथुर जी,
    मेरे लेख को पसन्द करने तथा उसे नयी पुरानी हलचल पर लिंक करने के लिए हार्दिक आभार!

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  27. ज्ञानवर्धक पोस्ट एतिहासिक जानकारी पढ़ने को मिली बहुत बहुत शुक्रिया दोस्त जी :)

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  28. ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ जी,
    कृतज्ञ हूं कि आपने मेरे लेख को पसन्द किया.
    हार्दिक धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  29. सवाई सिंह राजपुरोहित जी,
    जानकर प्रसन्नता हुई कि आपको मेरा लेख पसन्द आया....

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  30. मीनाक्षी पंत जी,
    आभारी हूं कि आपने मेरे लेख को ध्यान से पढ़ा और
    अपने विचार प्रकट किए...हार्दिक धन्यवाद!

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  31. एस एम हबीब जी,
    मेरे लेख को पसन्द करने के लिए हार्दिक आभार !

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  32. बहुत ही अच्छी प्रस्तुति है.. ..

    चित्रों के साथ पढने में मजा आ रहा है ..

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  33. SARADA.C.D. ji,
    Hearty Thanks for your comment...
    You are always welcome in my blog.

    उत्तर देंहटाएं
  34. बहुत बढ़िया, महत्वपूर्ण और ज्ञानवर्धक जानकारी प्राप्त हुई! धन्यवाद!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  35. प्राचीन स्थापत्य कला में ऐतिहासिक और धार्मिक तत्वों का निर्देशन बहुत कम पढ़ने को मिलता है .आपकी रोचक शैली और चित्रों के संयोजन से बहुत उपयोगी जानकारी मिलती है -आभार स्वीकारें !

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  36. बहुत अच्छी जानकारी...मेरे लिए काफी रुचिकर है आपका यह ब्लाग।

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  37. इतिहासिक विरासत की तार्किक शब्द - श :व्याख्या करता एक महत्वपूर्ण ,प्राचीन इतिहास और मानव शाश्त्र शोध छात्रों के लिए उपयोगी पोस्ट .पगोडा शब्द का उद्गम और दृष्टांत की खूबसूरत व्याख्या लिए .
    भाषाशास्त्रियों के अनुसार ‘पगोडा’ शब्द संस्कृत के ‘दगोबा’ शब्द का अपभ्रंश रूप है। बर्मी ग्रंथों में पगोडा शब्द का उद्भव लंका की भाषा सिंहल के शब्द ‘डगोबा’ से माना गया है जो मूलतः संस्कृत शब्द है।पधारें .Super food :Beetroots are known to enhance physical strength,say cheers to Beet root juice.Experts suggests that consuming this humble juice could help people enjoy a more active life .(Source: Bombay Times ,Variety).

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  38. बबली जी,
    मेरे लेख को पसन्द करने के लिए हार्दिक आभार !

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  39. प्रतिभा सक्सेना जी,
    कृतज्ञ हूं कि आपने मेरे लेख को पसन्द किया.
    हार्दिक धन्यवाद!

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  40. सुधीर जी,
    जानकर प्रसन्नता हुई कि आपको मेरा लेख पसन्द आया....

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  41. सुधीर जी,
    जानकर प्रसन्नता हुई कि आपको मेरा लेख पसन्द आया....

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  42. वीरूभाई जी,
    मेरे लेख को पसन्द करने के लिए हार्दिक आभार !

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  43. आप का यह आलेख बहुत अच्छा लगा. मेरे लिए यह विषय बहुत प्यारी है. मेरे ब्लॉग पर कभी पधारें. निराश नहीं होना पड़ेगा.
    http://mallar.wordpress.com

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